कार्यशाला में केंद्र सरकार, 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया ताकि साझा अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सहयोगात्मक कार्रवाई के माध्यम से आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया जा सके।
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से देश भर में सुलभ, जन-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाओं की उपलब्धता को मजबूत करने का आह्वान किया। वे कल हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में नीति आयोग द्वारा आयोजित 'राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष इकोसिस्टम को मजबूत करना' विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे।
इस कार्यशाला में केंद्र सरकार, 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया ताकि साझा अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सहयोगात्मक कार्रवाई के माध्यम से आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया जा सके।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्री प्रतापराव जाधव के अलावा नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रोफेसर (डॉ.) एम. श्रीनिवास और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी उपस्थित थे।
मुख्य भाषण में श्री जाधव ने आयुष प्रणालियों की पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जनसंख्या की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सुलभता और जन-केंद्रित वितरण पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।
प्रोफेसर (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने एकीकृत स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रौद्योगिकी-एकीकृत और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों के महत्व पर प्रकाश डाला, जिनमें भारत और उससे बाहर स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने की क्षमता है।
वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुष इकोसिस्टम को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर आयुष सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और वितरण को सुनिश्चित करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।
इस कार्यशाला ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आयुष स्वास्थ्य सेवा वितरण, शिक्षा, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के साथ एकीकरण सहित प्रमुख क्षेत्रों में अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और नवीन दृष्टिकोणों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।
विचार-विमर्श में एक मजबूत, सुलभ और जन-केंद्रित आयुष प्रणाली के निर्माण और सभी के लिए समग्र और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा के सरकार के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में केंद्र-राज्य सहयोग के महत्व की भी पुष्टि की गई।
सरकार एक तरफ तो सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है तो दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में तंबाकू का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है.भौगोलिक रूप से देखें तो गुटखा का सेवन भारत के मध्यवर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सबसे ज्यादा है.
धोखाधड़ी होने के बाद उसका पता लगाने या नुकसान की भरपाई करने से पहले, स्रोत पर ही रोकी गई रकम की चोरी- कोई प्राथमिकी नहीं, कोई जांच नहीं, किसी खाते से लेनदेन नहीं रोका गया, किसी रिकॉर्ड की मांग नहीं, नागरिकों की ओर से महीनों तक कार्रवाई की समीक्षा की आवश्यकता नहीं.