• 09 Sep, 2026

पढ़ाई से ज्यादा गुटखा खाने पर खर्च करते हैं लोग

पढ़ाई से ज्यादा गुटखा खाने पर खर्च करते हैं लोग

सरकार एक तरफ तो सामाजिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है तो दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में तंबाकू का इस्‍तेमाल बढ़ता जा रहा है.भौगोलिक रूप से देखें तो गुटखा का सेवन भारत के मध्यवर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सबसे ज्यादा है.

नई दिल्‍ली. कहते हैं असली भारत तो गांवों में बसता है. अगर ये सच है तो फिर भारत आज ‘गुटखा नेशन’ बन चुका है. घरेलू उपभोग को लेकर हाल में हुए एक सर्वे में बताया गया है कि ग्रामीण भारत के लोग अपनी कुल कमाई का सिर्फ 2.5 फीसदी पैसा पढ़ाई-लिखाई पर खर्च करते हैं, जबकि 4 फीसदी रकम गुटखा खाने पर खर्च कर देते हैं. यह रिपोर्ट साफ बताती है कि किस तरह देश में तंबाकू का इस्‍तेमाल बढ़ रहा है, जबकि 1 फरवरी से इससे बने उत्‍पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी होने वाली है.
सरकार की ओर से कराए गए घरेलू उपभोग एवं खर्च सर्वेक्षण (HCES) में यह कड़वी सच्‍चाई सामने आई है. तंबाकू का इस्‍तेमाल खासकर गरीब परिवारों के बीच ज्‍यादा गहरी जड़ें जमा रहा है. एक तरफ तो सरकार स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का विस्‍तार कर रही है और दूसरी ओर तंबाकू के बढ़ते इस्‍तेमाल से इस नीति को झटका लग सकता है. शिक्षा पर घटते खर्च की वजह से इन परिवारों का भविष्‍य भी दांव पर दिख रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण भारत में शिक्षा पर 2.5 फीसदी तो तंबाकू पर 4 फीसदी का खर्चा होता है.
महंगाई के हिसाब से देखें तो वित्‍तवर्ष 2011-12 से 2023-24 के बीच ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति तंबाकू पर खर्च 58 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 77 फीसदी तक बढ़ गया है. अब तंबाकू ग्रामीण इलाकों में मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) का लगभग 1.5 फीसदी और शहरी इलाकों में 1 फीसदी हिस्सा बन गया है. ऊपर से देखने पर ये आंकड़े मामूली लग सकते हैं, लेकिन तंबाकू का सेवन करने वाले परिवारों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है. ग्रामीण भारत में तंबाकू सेवन करने वाले परिवार 9.9 करोड़ (कुल परिवारों का 59.3 फीसदी) से बढ़कर 13.3 करोड़ (68.6 फीसदी) हो गए हैं. इसका मतलब है कि 
शहरी भारत में तंबाकू इस्‍तेमाल करने वाले परिवारों की संख्‍या में वृद्धि और भी तेज रही, जो 59 फीसदी है. यहां तंबाकू सेवन करने वाले परिवार 2.8 करोड़ (34.9 फीसदी) से बढ़कर 4.7 करोड़ (45.6 फीसदी) हो गए. अब तंबाकू का सेवन पारंपरिक इलाकों या खास वर्गों तक सीमित नहीं रहा है, यह ग्रामीण और शहरी भारत में मुख्यधारा का हिस्सा बनता जा रहा है. ग्रामीण इलाकों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से गुटखा और पत्ते वाले तंबाकू के इस्तेमाल से हो रही है. शहरों में सिगरेट का सेवन तेजी से बढ़ा है, लेकिन गुटखा भी पीछे नहीं है.
इस सर्वे में सबसे बड़ा खुलासा गुटखा के सेवन को लेकर हुआ. यहां गुटखा खाने वाले परिवारों की हिस्‍सेदारी करीब 6 गुना बढ़ गई है, जो पहले 5.3 फीसदी थी और अब 30.4 फीसदी है. आज ग्रामीण इलाकों में तंबाकू पर होने वाले कुल खर्च का 41 फीसदी गुटखे पर ही होता है, जिससे यह सबसे बड़ा तंबाकू उत्पाद बन गया है. शहरी भारत भी इससे अछूता नहीं है. शहरों में सिगरेट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तंबाकू उत्पाद है, जिसे 18.1 फीसदी शहरी परिवार इस्तेमाल करते हैं. साथ ही अब करीब 16.8 फीसदी शहरी परिवार भी गुटखा खाते हैं, जो दिखाता है कि यह उत्पाद शहरों में कितनी तेजी से फैल रहा है.

भौगोलिक रूप से देखें तो गुटखा का सेवन भारत के मध्यवर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सबसे ज्यादा है. यहां इसका प्रचलन राष्ट्रीय ग्रामीण औसत 30 फीसदी से कहीं अधिक है. ग्रामीण एमपी में हर 10 में से 6 परिवार गुटखा खाते हैं. यूपी में यह आंकड़ा 50 फीसदी के पार है. चिंता की बात यह है कि शहरी इलाकों में भी अब यही पैटर्न दिखने लगा है. एमपी के करीब आधे शहरी परिवार गुटखा खाते हैं, जबकि यूपी, बिहार और राजस्थान में भी यह आंकड़ा एक-तिहाई से ज्यादा है. पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गुटखा का सेवन राष्ट्रीय औसत से ऊपर है. दक्षिणी राज्यों में गुटखा कम खाते हैं, लेकिन यहां भी आंकड़े चिंताजनक हैं. कर्नाटक में 25 फीसदी ग्रामीण परिवार गुटखा खाता है.
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भारत में तंबाकू का सेवन गरीब परिवारों में सबसे ज्यादा होता है. ग्रामीण इलाकों में कमाई के निचले पायदान पर मौजूद 40 फीसदी परिवारों में से 70 फीसदी से भी ज्यादा तंबाकू का सेवन करते हैं. यूपी, एमपी और बिहार में यह आंकड़ा 85 फीसदी से भी ऊपर है. गरीब ग्रामीण परिवार अपने हर महीने के कुल खर्च का 1.7 फीसदी तंबाकू पर खर्च करते हैं, जबकि सबसे अमीर 20 फीसदी परिवार अपनी हर महीने के कुल खर्च का सिर्फ 1.2 फीसदी तंबाकू पर खर्च करते हैं. शहरी भारत में यह अंतर और भी गहरा है. यहां निचले 40 फीसदी परिवारों में आधे से ज्यादा तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि सबसे अमीर 20 फीसदी परिवारों में यह आंकड़ा 37 फीसदी से भी कम है.