• 08 Oct, 2026

नाना पाटेकर ने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था बाद में बन लेफ्टिनेंट कर्नल

नाना पाटेकर ने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था बाद में बन लेफ्टिनेंट कर्नल

नाना पाटेकर ने फिल्म ‘प्रहार’ में कमांडो की भूमिका के लिए भारतीय सेना से कड़ी ट्रेनिंग ली थी। बाद में उनका सेना से रिश्ता और गहरा हुआ और उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक मिली।

नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं। 75 साल की उम्र में 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हो गया। उनके जाने से सिर्फ हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक बेहतरीन अभिनेता नहीं खोया, बल्कि देश ने एक ऐसा इंसान भी खो दिया, जिसकी जिंदगी पर्दे से कहीं बड़ी थी। नाना भले ही हमारे बीच नहीं रहे लेकिन जवान और किसान के लिए उनका अटूट प्रेम हमेशा जिंदा रहेगा। नाना को लोग उनकी दमदार आवाज, गुस्से से भरे संवाद और अलग तरह की अदाकारी के लिए याद करेंगे। लेकिन उनकी जिंदगी का एक अध्याय ऐसा भी था, जो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं था।वह एक फिल्म में सेना के अधिकारी का किरदार निभाने के लिए भारतीय सेना के पास ट्रेनिंग लेने गए थे। ट्रेनिंग इतनी गंभीर थी कि देखते ही देखते यह सिर्फ एक फिल्म की तैयारी नहीं रही। नाना का सेना से रिश्ता इतना गहरा हो गया कि बाद में उन्होंने वास्तविक सैन्य जिम्मेदारियों का भी अनुभव किया और टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े रहे।साल 1991 में नाना पाटेकर की फिल्म आई थी- प्रहार: द फाइनल अटैक। फिल्म में उन्होंने मेजर प्रताप चौहान का किरदार निभाया था। नाना खुद इस फिल्म के लेखक और निर्देशक भी थे। लेकिन उन्होंने तय किया कि पर्दे पर सैनिक का किरदार सिर्फ वर्दी पहनकर नहीं निभाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने भारतीय सेना के साथ लंबी और कठिन ट्रेनिंग ली।

नाना ने खुद एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने प्रहार की तैयारी के दौरान करीब तीन साल तक भारतीय सेना के साथ ट्रेनिंग की। इस दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के जवानों और अधिकारियों के साथ समय बिताया। यानी जिस किरदार को दर्शक दो-ढाई घंटे की फिल्म में देखते हैं, उसके पीछे नाना ने वर्षों की मेहनत लगाई थी।
नाना पाटेकर 1999 में फिल्म की शूटिंग में बिजी थे,लेकिन उन्हें पता चलता है कि 1999 में कारगिल का युद्ध शुरू हो गया है। 
इसके बाद नाना पाटेकर तुरंत अपना सारा काम छोड़कर कारगिल युद्ध में शामिल होने के लिए तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को फोन करते हैं। नाना पाटेकर ने रक्षा मंत्री से कहा,मैं कारगिल युद्ध में शामिल होना चाहता हूं।
इसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस शुरुआत में तो नाना पाटेकर की परमिशन को रिजेक्ट कर देते हैं। 
लेकिन इसके बाद जब उनको पता चलता है कि नाना पाटेकर ने अपनी प्रहार फिल्म की शूटिंग के दौरान 6 महीनो तक आर्मी के साथ रहकर ट्रेनिंग की थी।
इसके बाद नाना पाटेकर को कारगिल युद्ध में शामिल होने की परमिशन मिल जाती है,परमिशन के बाद 60 दिनों तक टेरिटोरियल आर्मी में रहकर नाना पाटेकर कारगिल युद्ध में अपनी सेवाए करते हैं। 
नाना पाटेकर उस दौरान कारगिल युद्ध में सोपिया,बारामुला, कुपवाड़ा और द्रास जैसे सेक्टर में भी कई दिनों तक रहे थे।
नाना पाटेकर का कारगिल युद्ध के दौरान 75 किलो के करीब वजन था,लेकिन 60 दिनों तक आर्मी की सेवा करने के बाद उनका वजन 20 किलो तक घट गया था। 
नाना पाटेकर ने अपनी कारगिल युद्ध में शामिल होने की बात किसी को बताई नहीं थी,लेकिन बाद में लल्लनटॉप शो में पत्रकार के द्वारा पूछने पर पहली बार इस घटना का खुलासा किया था।
नाना पाटेकर के निधन पर पूरा देश उनको आज याद कर रहा है और अपनी दमदार एक्टिंग और अद्भुत प्रतिभा के दम पर नाना पाटेकर सदियों तक याद किए जाएंगे। विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏