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विमान हादसों में एयरलाइन कंपनियां कई तरह के इंश्योरेंस क्लेम करती हैं. इनमें एयरक्राफ्ट हुल इंश्योरेंस, स्पेयर पार्ट्स इंश्योरेंस और लीगल लाइयबिलिटी के लिए इंश्योरेंस क्लेम शामिल है.
विमान हादसों में एयरलाइन कंपनियां कई तरह के इंश्योरेंस क्लेम करती हैं. इनमें एयरक्राफ्ट हुल इंश्योरेंस, स्पेयर पार्ट्स इंश्योरेंस और लीगल लाइयबिलिटी के लिए इंश्योरेंस क्लेम शामिल है.अहमदाबाद में 12 जून को हुए प्लेन क्रैश की यादें लोगों को जेहन में अब तक ताजा हैं. इस हादसे में एयर इंडिया का एक प्लेन हॉस्टल की छत पर गिर गया था, जिसमें 241 यात्रियों की मौत हो हुई थी.
विमान हादसे के बाद, नियमों के अनुसार एयरलाइंस कंपनी की ओर से मृतकों के परिवारीजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया गया था. वहीं टाटा ग्रुप ने भी प्रति यात्री एक करोड़ रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया था. इस बीच लोगों के मन में सवाल है कि प्लेन क्रैश के बाद एयरलाइंस कंपनी को कितना क्लेम मिलता है?
पहले तो यह बता दें कि विमान हादसों में एयरलाइन कंपनियां कई तरह के इंश्योरेंस क्लेम करती हैं. इनमें एयरक्राफ्ट हुल इंश्योरेंस, स्पेयर पार्ट्स इंश्योरेंस और लीगल लाइयबिलिटी के लिए इंश्योरेंस क्लेम करती हैं.जहां तक एयर इंडिया विमान हादसे की बात है तो विमानन कंपनी की ओर से लिया गया क्लेम, विमान की क्षति और यात्रियों की मौत को कवर करेगा. यानी विमान की पूरी क्षति और यात्रियों की मौत दोनों कवर में आएंगे.
ालांकि, जब भी कोई विमान क्रैश होता है तो विमानन कंपनी को एयरक्राफ्ट का डिक्लेयर्स वैल्यू इंश्योरेंस कंपनी को बतनी होती है, उसी आधार पर नुकसान का आंकलन किया जाता है. 12 जून को हुए हादसे में बोइंग 787 ड्रीमलाइन दुर्घटना का शिकार हुआ था, जिसकी डिक्लेयर्स वैल्यू 211 से 280 मिलियन डॉलर के बीच मानी जाती है.इसके अलावा हादसे में थर्ड पार्टी को होने वाले नुकसान को भी जोड़ा जाता है. दरअसल, एयर इंडिया का विमान रिहायशी इलाके में गिरा था, जिससे थर्ड पार्टी को भी नुकसान हुआ था. इस नुकसान की भरपाई भी इंश्योरेंस कंपनी की ओर से की जा सकती है.एक्सपर्ट्स का कहना है कि सभी तरह के क्लेम मिलाकर एयरलाइन कंपनियों को कई सौ करोड़ का इंश्योरेंस क्लेम मिलता है. जहां तक एयर इंडिया विमान हादसे की बात है तो इंश्योरेंस क्लेम की राशि 211 से 280 मिलियन डॉलर तक हो सकती है, जो भारतीय रुपयों में करीब 2400 करोड़ रुपये तक हो सकती है.
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