सेहत मिशन लॉन्च: खेती से स्वास्थ्य तक भारत की नई बड़ी पहल
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आपको याद होगा कुछ समय पहले इजरायल में संकट हुआ था तो भारत ने अपने लोगों को वहां काम करने के लिए भेजा था. अब एक और दोस्त देश भारतीयों को बुला रहा है. वहां के लोग या तो यूक्रेन से जंग लड़ रहे हैं या फिर ऐसे काम करना नहीं चाहते हैं. इसी साल अगर आप रूस जाकर काम करने की इच्छा रखते हैं तो ऐसे 10 लाख लोगों की भर्ती होने वाली है.
इजरायल की तरह रूस भी लेबर क्राइसिस से जूझ रहा है. इससे निपटने के लिए भारत का भरोसेमंद दोस्त इस साल के आखिर तक 10 लाख वर्करों की भर्ती करने की योजना बना रहा है. रूस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है. रूस में नया संकट ऐसे समय में आया है जब देश यूक्रेन के साथ तीन साल से जंग लड़ रहा है.
कॉमर्स और इंडस्ट्री से जुड़े रूस के एंद्रेई बेसेडिन ने एक इंटरव्यू में बताया कि भारत के साथ समझौता हो गया है. भारतीय अधिकारियों से जो मैंने सुना है कि वहां से 10 लाख स्पेशलिस्ट कामगार रूस आएंगे. ये रूस के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करेंगे. यह भी पता चला है कि इन भारतीय कामगारों के प्रबंधन के लिए येकातेरिनबर्ग में एक नया भारतीय कांसुलेट खोला जाएगा.
मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये कर्मचारी स्वेर्दलोवस्क इलाके में इजीनियरिंग और मेटल्स से जुड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की कमी को दूर करेंगे. रूसी अधिकारियों ने बताया है कि कई स्थानीय कर्मचारी यूक्रेन से जंग लड़ रहे हैं जबकि युवा कारखानों में नौकरी नहीं करना चाहते हैं.
रूसी मीडिया ने खबर दी है कि श्रीलंका और उत्तर कोरिया सहित कई देशों से भी कामगारों को बुलाने के प्रयास चल रहे हैं. उत्तर कोरियाई कामगारों के बारे में एक रूसी अधिकारी ने कहा कि वे लोग अच्छे कामगार होते हैं.
बताया जा रहा है कि रूसी कंपनियों में भारतीय लेबर पहले से ही काम करना शुरू कर चुके हैं. अब इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है. मार्च में मॉस्को के डिवेलपर Samolyot Group ने भारतीय कंस्ट्रक्शन वर्करों को हायर कर पायलट प्रोग्राम शुरू किया था. एक अधिकारी ने कहा कि अब तक हम पूर्व सोवियत स्टेट्स से आए प्रवासियों से काम कराते रहे हैं, जिन्होंने रूस में पढ़ाई की है और यहां की भाषा भी बोलते हैं. अभी श्रीलंकाई और भारतीय कामगारों के साथ ज्यादा काम का अनुभव नहीं है. थोड़ा मुश्किल आ सकती है लेकिन आगे सब ठीक हो जाएगा. रूसी कंपनियां और मैनेजमेंट से जुड़े लोग मानते हैं कि भारतीय कम वेतन में काम कर लेते हैं. हां, थोड़ी भाषायी और सांस्कृतिक बाधाएं जरूर आ सकती हैं.
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