• 17 Sep, 2026

ये हैं मोदी सरकार के नए चाणक्य

ये हैं मोदी सरकार के नए चाणक्य

"100 रुपये के लेनदेन पर सिर्फ 40 पैसे देने हैं, वह भी केवल बड़े लेनदेन पर... क्या 40 पैसे देने से आप मर जाएंगे? आपको व्यवस्था चलाने के लिए लागत देनी होगी।"

नयी दिल्ली / मोदी सरकार के नए चाणक्य हैं नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिड़ी। उन्होंने  बड़े UPI भुगतानों पर लगने वाले नए चार्ज का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बिना टैक्स वसूले सरकार नहीं चल सकती। बड़े लेनदेन पर लगने वाले मामूली चार्ज की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, "100 रुपये के लेनदेन पर सिर्फ 40 पैसे देने हैं, वह भी केवल बड़े लेनदेन पर... क्या 40 पैसे देने से आप मर जाएंगे? आपको व्यवस्था चलाने के लिए लागत देनी होगी।"

लाहिड़ी ने प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य चाणक्य का हवाला देते हुए कहा कि जैसे एक भौंरा फूल को बिना नुकसान पहुंचाए उससे धीरे-धीरे शहद निकालता है, उसी तरह सरकार को भी बिना ज्यादा बोझ डाले व्यवस्था चलानी चाहिए। लाहिड़ी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार को बिना सब्सिडी दिए व्यवसायों को आत्मनिर्भर बनाने के रास्ते खोजने होंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी राय है।

गौरतलब है कि सरकार ने 15 अक्टूबर से मर्चेंट्स (व्यापारियों) को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% एमडीआर (MDR) लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले में आम लोगों के बीच (P2P) और छोटे भुगतानों को छूट दी गई है। वहीं, इस नए नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।

लाहिड़ी ने 100 रुपये के लेनदेन का उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि 100 रुपये पर 40 पैसे (0.4%) का शुल्क देना पड़े और वह भी केवल बड़े ट्रांजैक्शन पर, तो इससे किसी को नुकसान नहीं होने वाला है। उन्होंने चेक बुक का उदाहरण देते हुए कहा कि जब बैंक से चेक बुक लेते हैं, तो उसके लिए भी पैसे चुकाए जाते हैं, जिससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने चाणक्य के उस प्रसिद्ध श्लोक का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि राजा को नागरिकों से कर इस तरह वसूलना चाहिए जैसे भौंरा फूल से बिना उसे चोट पहुंचाए रस इकट्ठा करता है।

बता दें कि लगभग 6 वर्षों तक पूरी तरह मुफ्त रहने के बाद, सरकार ने 15 अक्टूबर से मर्चेंट को यूपीआई के जरिए किए जाने वाले 2000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लागू किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह चार्ज आम ग्राहकों या छोटे लेन-देन पर नहीं लगेगा। रोजमर्रा के पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

मामले में सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला यूपीआई इकोसिस्टम को मजबूत करने और उसकी सुरक्षा-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है, ताकि डिजिटल पेमेंट सिस्टम लंबे समय तक टिकाऊ रह सके।