मोदी के निशाने पर 20 मंत्री, खुद लिया उनके काम का जायज़ा
पीएम मोदी ने कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे अहम विभागों के लगभग 20 राज्य और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री बैठक में शामिल हुए।

विश्व साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में साक्षरता के महत्व और शिक्षा के अधिकारों के प्रति जागरूकता लाना है। UNESCO ने साल 1966 में हर साल 8 सितंबर को 'इंटरनेशनल लिटरेसी डे' (अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस) मनाने का ऐलान किया था। इसे पहली बार 1967 में मनाया गया था। 2026 में इंटरनेशनल लिटरेसी डे की थीम ' Literacy for People, the Planet and Prosperity'
नईदिल्ली / भारत में स्कूल लेवल पर साक्षरता की बात की जाए तो 14 से 18 साल की उम्र में ऐसे 2 करोड़ बच्चे हैं, जो स्कूल नहीं जाते। नीति आयोग की हालिया पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, 14-18 साल की उम्र के लगभग 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, जबकि कक्षा 3-8 के लगभग 11% बच्चे स्कूल से बाहर हैं और हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र बोर्ड परीक्षा में फेल हो जाते हैं।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट बताती है कि स्कूल छोड़ने का सबसे ज्यादा रेट 10वीं की पढ़ाई के बाद का है। अलग-अलग लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के आंकड़े (प्रतिशत में) कुछ प्रकार हैं-
प्राइमरी लेवल (कक्षा 1 से 5) - 0.3
अपर प्राइमवरी लेवल (कक्षा 6 से 8) - 3.5
सेकेंडरी लेवल (कक्षा 9 और 10) - 11.5% (यह आंकड़ा बताता है कि सेकेंडरी स्कूल लेवल पर लगभग 10 से में से 1 बच्चा स्कूल छोड़ देता है।)
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने और 'आत्मनिर्भर भारत' की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) स्कूल से बाहर रहने वाले और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की पहचान करने और उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू करने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में 2030 तक प्री-स्कूल से लेकर सेकेंडरी लेवल तक 100% ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
दुनिया में 73.9 करोड़ लोग पढ़-लिख भी नहीं पाते
दुनियाभर में करीब 60 साल से सारक्षता दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन आपको जानकर शायद हैरानी हो सकती है कि आज भी दुनिया भर में 73 करोड़ से ज्यादा ऐसे युवा हैं, जो बेसिक लिखना-पढ़ना भी नहीं जानते।
यूनेस्को इंस्टीट्यूट फॉर स्टैटिस्टिक्स (UIS) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में वयस्कों की साक्षरता दर लगभग 88 प्रतिशत है, जबकि 15 से 24 साल के युवाओं में साक्षरता दर 93 प्रतिशत है। इसमें पिछले कुछ वर्षों में बढोतरी हुई है। 1950 में, दुनिया के लगभग 56 प्रतिशत युवा पढ़े-लिखे थे, जिनकी संख्या 1980 तक बढ़कर लगभग 70% हो गई।
इसके बावजूद बिना पढ़े-लिखे युवाओं की अनुमानित संख्या 73.9 करोड़ बताई जाती है। इनमें दो-तिहाई महिलाएं हैं। यह आंकड़ा बताता है कि क्यों स्कूलिंग तक सबकी पहुंच बढ़ाने से साक्षरता में असमानता अपने-आप खत्म नहीं हो जाती।
UIS शिक्षा डेटा से पता चलता है कि जिस उम्र में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा पूरी कर लेनी चाहिए, उस उम्र में केवल आधे बच्चे ही पढ़ने में न्यूनतम दक्षता हासिल कर पाते हैं। ग्लोबल लेवल पर, 62 प्रतिशत युवा अपर सेकेंडरी शिक्षा पूरी करते हैं, जबकि सब-सहारा अफ्रीका में यह आंकड़ा केवल 29 प्रतिशत है।
पीएम मोदी ने कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे अहम विभागों के लगभग 20 राज्य और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री बैठक में शामिल हुए।
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