नयी दिल्ली / संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 78 देशों की 99 विदेश यात्राएं की हैं, जिन पर सरकार ने ₹815 करोड़ खर्च किए हैं। महंगाई को ध्यान में रखते हुए, मौजूदा रुपये के हिसाब से यह खर्च ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा हो जाता है।कुल मिलाकर, उन्होंने विदेश में 352 दिन बिताए हैं। वे औसतन हर छह हफ़्ते में एक बार यात्रा पर गए हैं और उनकी हर यात्रा का औसत समय चार दिन से थोड़ा कम रहा है।ये आंकड़े बताते हैं कि उनकी विदेश नीति में व्यक्तिगत कूटनीति कितनी अहम रही है। अमेरिका उनके दौरों में सबसे ज़्यादा बार और सबसे महंगा पड़ा है; वहां 10 बार दौरे हुए और कुल खर्च का लगभग पांचवां हिस्सा वहीं हुआ। फ्रांस, जापान और रूस भी उनके दौरों और खर्चों की लिस्ट में प्रमुखता से शामिल हैं।
सितंबर 2019 का उनका अमेरिका दौरा अब तक का सबसे महंगा दौरा रहा है। महामारी के कारण 2020 में यात्राएं पूरी तरह रुक गई थीं, लेकिन उसके बाद इनमें तेज़ी से उछाल आया और 2025 अब तक का सबसे महंगा साल साबित हुआ। हालांकि उनकी यात्राएं दुनिया भर में फैली हुई हैं, लेकिन कुछ खास रणनीतिक साझेदार देशों पर ज़्यादा ध्यान देने से पता चलता है कि उनकी पहुंच बनाने की रणनीति कितनी केंद्रित रही है।
मोदी सबसे ज्यादा (10 बार) अमेरिका गए हैं। इसके बाद जापान, फ्रांस और यूएई गए हैं। इन देशों में वे 8-8 बार गए हैं। सात बार रूस और छह बार जर्मनी व चीन होकर आए हैं। भारत के पड़ोसी देशों में वह सबसे ज्यादा, छह बार चीन गए हैं।
2015 में हुई मध्य एशिया यात्रा (उज़्बेकिस्तान, कज़ाखस्तान, रूस, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिज़ गणराज्य, ताजिकिस्तान) एक ही दौरे में सर्वाधिक 6 देशों को कवर करने वाली यात्रा रही।
2025 की जुलाई यात्रा (घाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, नामीबिया) 5 देशों के साथ हाल के वर्षों की सबसे लंबी बहु-देशीय यात्रा (8 दिन) थी।
2019 में USA यात्रा (सितंबर 21-28) पर सबसे अधिक खर्च (लगभग 37.71 करोड़ रुपये) हुआ।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा (2011) पर 10,74,27,363 रुपये, रूस यात्रा (2013) पर 9,95,76,890 रुपये, फ्रांस यात्रा (2011) पर 8,33,49,463 रुपये और जर्मनी यात्रा (2013) पर 6,02,23,484 रुपये खर्च हुए।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री की विभिन्न देशों की यात्राओं पर करीब 187 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें से फ्रांस यात्रा पर 25,59,82,902 रुपये, अमेरिका यात्रा पर 16,54,84,302 रुपये, सऊदी अरब यात्रा पर 15,54,03,792.47 रुपये, ब्राजील यात्रा पर 17,72,22,144 रुपये, चीन यात्रा पर 10,59,90,561 रुपये और ब्रिटेन यात्रा पर 9,91,55,061.39 रुपये खर्च हुए।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 2025 में मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, नामीबिया, मालदीव, जापान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, ओमान और इथियोपिया की भी यात्रा की।
सरकार ने जुलाई 2025 में राज्यसभा में एक अन्य लिखित जवाब में बताया था कि 2021 से 2024 तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च करीब 295 करोड़ रुपये रहा।
आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री की वर्ष 2024 में रूस, यूक्रेन, अमेरिका और ब्राजील समेत 16 देशों की यात्राओं पर करीब 109 करोड़ रुपये, वर्ष 2023 में करीब 93 करोड़ रुपये, वर्ष 2022 में 55.82 करोड़ रुपये और वर्ष 2021 में करीब 36 करोड़ रुपये खर्च हुए।
वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश, अमेरिका, इटली और ब्रिटेन की यात्रा की थी। इन यात्राओं पर क्रमश: 1,00,71,288 रुपये, 19,63,27,806 रुपये, 6,90,49,376 रुपये और 8,57,41,408 रुपये खर्च हुए थे।
प्रधानमंत्री की यात्राओं का यह ब्योरा समय-समय पर सांसदों के सवाल के जवाब के रूप में विदेश मंत्रालय की ओर से लोक सभा या राज्य सभा में रखा जाता रहा है। ताजा ब्योरा 6 अगस्त, 2026 को राज्य सभा में संजय सिंह और वी शिवदासन के पूछे सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गरीटा ने दिया है। दोनों सांसदों ने बीते पांच सालों में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए विदेश दौरों का ब्योरा पूछा था।
बता दें कि इस यात्रा खर्च में प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल होने वाले विमानों के रखरखाव आदि का खर्च शामिल नहीं होता। दिसंबर 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने राज्य सभा में बताया था कि 2014 से 2018 के बीच पीएम मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान चार्टर्ड विमान, विमानों के रखरखाव और हॉटलाइन सुविधा पर 2021 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। तब उन्होंने यह भी बताया था कि इन्हीं मदों में 2009-10 से 2013-14 के बीच मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं के दौरान 1346 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।